जयपुर गोविंदगढ़ में पूजा सिंह ने ‘कृष्ण जी’ के साथ लिए 7 फेरे ,जाने पूरा मामला

लड़की ने ‘ठाकुरजी’ जी संग रचाई शादी | MA पास पूजा सिंह ने ‘कृष्ण जी’ के साथ लिए 7 फेरे | Pooja Singh Marriage with Thakur Ji |  जयपुर से श्रीकृष्ण भक्ति का अनूठा मामला सामने आया है यहां की रहने वाली एक लड़की ने ‘ठाकुर जी’ संग 7 फेरे लिए हैं।

Girl Marriage with Thakur Ji in Jaipur:‘ठाकुर जी’ की भक्ति अनमोल है, इसे भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) से प्रेम करने वाले भक्त अच्छी तरह से जानते हैं, ऐसे ही श्रीकृष्ण भगवान से प्रेम का अनूठा मामला सामने आया है, यहां की एक लड़की ने ‘ठाकुर जी’ संग सात फेरे लिए हैं

हाईलाइट

  • पूजा सिंह पॉलीटिकल सांइस में MA की है, इस शादी की खासी चर्चा हो रही है
  • पूजा ने हाथ में ‘ठाकुरजी’ को सिंहासन समेत उठाकर अग्नि के सात फेरे लिए
  • शादी में मंदिर की सजावट की गई और करीब 300 लोगों का खाना भी बनावाया गया
  • कलयुग की मीरा बाई पूजा सिंह
  • शादी में 300 लोग मौजूद थे…
  • दुल्हन के हाथों में मेहंदी थी…
  • वरमाला हुई, फेरे लिए गए…
  • कन्यादान और विदाई भी हुई..
Pooja Singh Marriage with Thakur Ji: राजस्थान के गोविंदगढ़ जयपुर से बडी खबर है जहाँ शादी का अनोखा मामला सामने आया है जहां पर राजस्थान की पूजा सिंह ने श्री कृष्ण जी के साथ सात फेरे लिए और पूरे रसम रिवाज के साथ शादी की।

पूजा सिंह ने ‘कृष्ण जी’ के साथ लिए 7 फेरे

राजस्थान के जयपुर के गोविंदगढ़ में पूजा सिंह ने कृष्ण भगवान ‘ठाकुर जी’ से शादी की है, हालांकि शादी में पिता ने शिरकत नहीं की, जबकि उसकी मां ने सारी रस्‍में पूरी की।पूजा ने हाथों में ‘ठाकुर जी’ के नाम की मेहंदी रचाई और हाथ में ‘ठाकुरजी’ को सिंहासन समेत उठाकर अग्नि के सात फेरे भी लिए और मांग में सिंदूर भरकर विवाहित हो गई पूजा ने बताया कि उन्होंने अपने ननिहाल में तुलसी विवाह देखा था उसी वक्त से उनके मन में श्रीकृष्ण के रुप ‘ठाकुरजी’ को लेकर आसक्ति बढ़ी।

पूजा सिंह के पिता इस बात से नाराज हो गए

पूजा ने ठाकुरजी से विवाह की बात मां से की जिसे सुनते ही वो चकित हो गईं वहीं पूजा के पिता इस बात से नाराज हो गए, हालांकि मां ने बाद में हामी भर दी और पूजा को दुल्हन के लिबास में तो ठाकुरजी का श्रृंगार दूल्हे की तरह किया गया और बड़ी ही धूमधाम से 8 दिसंबर को पूजा का विवाह ठाकुरजी के साथ कराया गया, घर में रोजाना मंगल गीत भी गाए गए।
पूजा की कुंडली में न कोई दोष है और न ही उन्होंने कोई मनौती मांगी। फिर पूजा ने ये शादी क्यों की?

जानने के लिए पढ़िए पूरी कहानी पूजा की जुबानी..

Pooja Singh Marriage with Thakur Ji govindhgarh jaipur

बचपन से देखे थे पति-पत्नी के झगड़े’‘मेरी उम्र 30 साल हो चुकी है। अमूमन 20 से 25 साल की उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है। मेरे घर में भी इसकी सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी। अक्सर रिश्ते आते रहते थे। लोग मेरे मम्मी-पापा को कहने लगे थे कि बेटी की अब तो शादी कर दो, लेकिन मेरा मन इसके लिए तैयार नहीं था। मैंने बचपन से ही देखा है कि बेहद मामूली बात पर पति-पत्नी के बीच झगड़े हो जाते थे, विवादों में उनकी जिदंगी खराब हो जाती थी और इनमें महिलाओं को बहुत ही बुरी स्थिति का सामना करना पड़ता था। बड़ी होते होते मैंने निर्णय कर लिया था कि मैं शादी नहीं करूंगी।

शादी के लिए आए हर रिश्ते को मना किया’

‘कॉलेज करने के बाद से ही मेरे लिए रिश्ते आने लगे। मम्मी-पापा भी जान पहचान वालों से कहते कि कोई अच्छा लड़का हो तो इसके लिए बताना। घर में इस तरह की बातें होने लगी कि बेटी है, बड़ी हो गई है, कब तक कुंवारी रखोगे। अब शादी कर दो, इन बातों से मैं परेशान होने लगी।

तुलसी विवाह के बारे में सुनकर किया फैसला’

‘मैंने तुलसी विवाह के बारे में सुन रखा था। एक बार अपने ननिहाल में देखा भी था। सोचा कि जब ठाकुरजी तुलसाजी से विवाह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं ठाकुरजी से विवाह कर सकती। मैंने इसके बारे में पंडित जी से पूछा तो उन्होंने भी कहा कि ऐसा हो सकता है। इसके बाद मां से बात की, शुरू में तो वे बोली कि ऐसा कैसे हो सकता है, लेकिन फिर मान गई। जब हमने पापा को बताया तो वे नाराज हो गए और साफ मना कर दिया। नाराजगी के कारण पापा इस शादी में भी नहीं आए।

खुद ने चंदन से भरी मांग

शादी में परंपरानुसार दुल्हा दूल्हन की मांग सिंदूर से भरता है, लेकिन इस शादी में यह परंपरा भी कुछ अलग तरीके से हुई। ठाकुरजी की ओर से खुद पूजासिंह ने अपनी मांग भरी। ठाकुरजी को सिंदूर से अधिक चंदन पसंद होता है, इसलिए पूजासिंह ने अपनी मांग भी सिंदूर की बजाय चंदन से भरी।

शादी की सारी रस्में निभाई, मां ने किया कन्यादान

पूजा सिंह और ठाकुरजी का यह विवाह सभी रीति रिवाजों से हुआ। बाकायदा गणेश पूजन से लेकर चाकभात, मेहंदी, महिला संगीत और फेरों की रस्में हुई। ठाकुरजी को दूल्हा बनाकर गांव के मंदिर से पूजा सिंह के घर लाया गया। मंत्रोच्चार हुआ और मंगल गीत गाए गए। पिता नहीं आए तो मां ने फेरों में बैठकर कन्यादान किया। इसके बाद विदाई हुई। परिवार की ओर से कन्यादान और जुहारी के 11000 रुपए दिए गए। ठाकुर जी को एक सिंहासन और पोशाक दी गई

अब जमीन पर सोती हैं, रोजाना बनाती हैं भोग

पूजा सिंह बताती हैं कि अब कोई मुझे यह ताना नहीं मार सकता कि इतनी बड़ी होकर भी कुंवारी बैठी है। मैंने भगवान को ही पति बना लिया है। शादी के बाद ठाकुरजी तो वापस मंदिर में विराजमान हो गए हैं जबकि पूजा अपने घर पर रहती है। अपने कमरे में पूजा ने एक छोटा सा मंदिर बनाया है, जिसमें ठाकुरजी हैं। वह उनके सामने अब जमीन पर ही सोती है। रोजाना सवेरे सात बजे मंदिर में विराजमान ठाकुरजी के लिए वह भोग बनाकर ले जाती हैं। जिसे मंदिर के पुजारी भगवान को अर्पित करते हैं। इसी तरह वह शाम को भी मंदिर जाती हैं।

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